Ganga Chintan Shivir

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Ganga Chintan Shivir Event Date: 16-01-2018

जल जन जोड़ो अभियान एवं जल बिरादरी के तत्वाधान में आज गंगा चिंतन शिविर का आयोजन गाँधी शान्ति प्र्रतिष्ठान में किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने उपस्थित सामाजिक चिंतकों एवं पर्यावरणविदों के समक्ष कहा कि वह 23 मार्च 2018 को पानी, किसानी और जवानी को लेकर देशव्यापी आन्दोलन की शुरुआत करने जा रहे हैं और गंगा को बचाने के लिए मैं पूरी तरह साथ हूं। आज गांव में बदलाव से शुरुआत करनी होगी। महात्मा गांधी ने कहा था कि प्रकृतिक और मानव का दोहन करके जो विकास होता है वह सास्वत नहीं इसलिए हमें अपनी गंगा मां और प्रकृति का दोहन रोकने हेतु युवाओं को संगठित करना होगा। साथ ही यदि गंगा को बचाना है तो सच्चे संकल्प एवं प्रतिज्ञा करने की आवश्यकता है। 
इस अवसर पर जल पुरुष राजेन्द्र सिंह ने गंगा नदी 5 राज्यों से होकर निकलती है जो कि उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड तथा पश्चिम बंगाल तथा गंगा बेसिन के 6 अन्य राज्य मध्य प्रदेश, छत्तीसगण, पंजाब, हरयाणा, राजस्थान तथा हिमांचल है, से गंगा प्रेमियों तथा जल संरक्षक को संबोधित करते हुए कहा कि गंगा मां को उनके पूर्व स्वरुप में लाने हेतु अब सिर्फ आन्दोलन नहीं किया जाएगा बल्कि समाधान हेतु अनवरत प्रयास किए जाएगा। इस प्रयास में समुदाय के सहयोग के साथ-साथ वैज्ञानिकों के सुझाव भी महत्वपूर्ण रहेंगे। उन्होंने कहा कि गंगा को समझने, सहेजने के लिए हर वर्ग को संगठित करने की आवश्यकता है। हमारी कार्ययोजना है कि आगामी आन्दोलन सत्य व अहिंसा के रास्ते में चलकर आगे बढ़ाया जाएगा। गंगा को लेकर वल्र्ड वाइल्ड फोरम, भारतीय प्रौद्यागिक संस्थानों, भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून द्वारा तैयार रिपोर्ट के आधार पर रिपोर्ट के आधार पर निकलकर आया था कि गंगा प्रदूषित हो चुकी है जिसे उपचारित करने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर वरिष्ठ गांधीवादी चिन्तक एवं सामाजिक कार्यकर्ता सुब्बा राव ने कहा कि गंगा नदी के प्रति जनमानस को शिक्षित एवं संवेदित करने की आवश्यकता है। गंगा पुर्नजीवन हेतु आवण्टित धनराशि में से यदि 1 प्रतिशत धनराशि युवाओं को संगठित एवं जागरुक करने में उपयोग में लायी जाए तो युुवाओं में भी गंगा के प्रति अपनत्व का भाव जागृत होगा। श्रम में अपार शक्ति होती है इसलिए श्रम करके गंगा को अविरल और निर्मल बनाना जा सकता है। सीवर को गंगा में सीधा प्रवाहित न करके उसको शोधित करके प्रवाहित किया जाए जो कि असम्भव नहीं है। 
इस अवसर पर राष्ट्रीय पर्यावरणीय अभियंत्रिकी अनुसंधान संस्थान के निदेशक राकेश कुमार ने कहा कि सरकार यदि कोई भी परियोजना करती है तो समाज और पर्यावरण दोनों को ध्यान में रखती है। परन्तु वर्तमान परियोजनाओं में कुछ बिन्दुओं में बदलाव किए जाने की आवश्यकता है जिससे जलीय जन्तुओं को संरक्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण हेतु गंगा समेत अन्य नदियों पर बने डैम से जो पीड़ा उत्पन्न हुयी है साथ ही गंगा नदी में गिरने वाले सीवर के पानी को उपचारित कर गंगा को प्रदूषित होने से रोका जा सकता है। 
चिन्तन शिविर के दौरान डब्ल्यू0डब्ल्यू0एफ0 में रिवर बेसिन एवं जल नीति में निदेशक डाॅ0 सुरेश बाबू ने कहा कि गंगा को उसके पुर्नस्वरुप में लाने हेतु उसकी सहायक नदियों को प्रदूषण व अतिक्रमण मुक्त बनाने की आवश्यकता है। गंगा नदी बेसिन प्रबन्धन कार्ययोजना में यह तय हुआ था कि गंगा 2020 तक अविरल व निर्मल हो जाएगी परन्तु वस्तुतः स्थिति यह है कि गंगा की सहायक नदी काली पूरी तरह से प्रदूषित हो चुकी है। सुरेश बाबू ने कहा कि गंगा में कितना सेमी0 प्रवाह होना चाहिए आज तक इसपर कोई भी अध्ययन नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जिले एवं राज्य स्तर पर गंगा साक्षरता समिति का गठन, कृषि में पानी के समुचित उपयोग हेतु वाटर बजटिंग करने की आवश्यकता है साथ ही साथ पर्यावरणीय प्रवाह हेतु नदी के पानी को नदी हेतु संरक्षित करने हेतु नीति निर्माण की आवश्यकता है।
इस अवसर पर जल-जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह ने कहा कि गंगा को उनके पूर्व स्वरुप में लाने हेतु 21 सदस्यीय टाॅस्क फोर्स का गठन किया गया है जिसमें विषय विशेषज्ञ, समाज एवं न्यायविदों को सम्मिलित किया जो कि गंगा रिवर बेसिन के 11 राज्यों से हैं।